Tuesday 2 April 2013

On this day, two years ago the Indian Cricket Team made more than 1 billion people proud by lifting the ICC Cricket World Cup! Revisit India's glorious journey by sharing with us your most entertaining moments of the tournament!

On this day, two years ago the
Indian Cricket Team made more
than 1 billion people proud by
lifting the ICC Cricket World Cup!
Revisit India's glorious journey by
sharing with us your most
entertaining moments of the
tournament!

Htet 2013 English is as subject

हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए
बोर्ड ने तैयार
किया प्रस्ताव
भिवानीत्न हरियाणा अध्यापक
पात्रता परीक्षा में भाषा शिक्षकों के
लिए अंग्रेजी विषय अनिवार्य नहीं रहेगा। बोर्ड
अधिकारियों ने इसके
लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है और जल्द
ही इस प्रस्ताव को बोर्ड चेयरमैन
के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
अभी तक एचटेट में भाषा शिक्षकों (हिंदी, उर्दू,
संस्कृत व पंजाबी)
को अंग्रेजी विषय
की परीक्षा भी देनी पड़ती थी। मगर, इस वर्ष
होने
वाली परीक्षा में भाषा शिक्षकों के लिए
अंग्रेजी विषय अनिवार्य
नहीं रहेगा, बल्कि इसमें भाषा शिक्षकों के लिए
विकल्प उपलब्ध
कराया जाएगा। यह विकल्प हिंदी व
अंग्रेजी विषय का रहेगा। अब तक चार
कैटेगरी (हिंदी, संस्कृत, उर्दू व पंजाबी)
होती थी।
यह रहेगा पैटर्न: 30 अंक का मनोविज्ञान, 60
अंक का गणित, विज्ञान
या सामाजशास्त्र, 30 अंक की अंग्रेजी, हिंदी,
संस्कृत, उर्दू या पंजाबी और
30 अंक
की हिंदी या अंग्रेजी को भाषा शिक्षकों के लिए
तैयार पेपर पैटर्न
में रखा गया है।
यह मिलेगा लाभ: हिंदी शिक्षक
(जिसका हिंदी मुख्य विषय है) 60
अंकों की हिंदी कर सकेगा। वहीं, अंग्रेजी शिक्षक
भी 60
अंकों की अंग्रेजी कर सकेंगे। इसके
अलावा पंजाबी, उर्दू व संस्कृत वाले
शिक्षकों के सामने विकल्प होगा कि वे 30
अंकों की अंग्रेजी करें या फिर
30 अंकों की हिंदी। संयुक्त सचिव
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड
महेंद्र सिंह ने कहा कि यह प्रस्ताव बोर्ड
अधिकारियों ने तैयार किया है।
इससे भाषा शिक्षकों को लाभ होगा।
फिलहाल इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए चेयरमैन
के सामने रखा जाएगा।
महेंद्र सिंह, संयुक्त सचिव, हरियाणा विद्यालय
शिक्षा बोर्ड

Sunday 31 March 2013

Avdhi poori teyyari adhoori

शिक्षा अधिकार कानून

शिक्षा अधिकार कानून
सरकारें अपने सामाजिक
दायित्वों को पूरा करने के प्रति किस
तरह बेपरवाह हैं, इसका एक और प्रमाण है
शिक्षा अधिकार कानून का आधे-अधूरे ढंग
से लागू होना। 6 से 14 साल तक के
सभी बच्चों को शिक्षित करने वाला यह
कानून इतने आधे-अधूरे ढंग से अमल में आ
सका है कि यह उम्मीद
भी नहीं की जा सकती कि आने वाले एक-
दो वर्षो में स्थिति संतोषजनक
हो सकेगी। इस महत्वाकांक्षी कानून के
अमल में लापरवाही का परिचय दिए जाने
से एक बार फिर यह स्पष्ट हो रहा है
कि केवल कानून बना देने से न
तो किसी समस्या का समाधान होता है
और न ही कोई उपलब्धि हासिल
की जा सकती है। निराशाजनक यह है
कि देश की तस्वीर बदल सकने वाले इस
कानून के प्रति केंद्र ने
भी सुस्ती का परिचय दिया और राज्य
सरकारों ने भी। शायद यही कारण है
कि तीन वर्ष का समय दिए जाने के
बावजूद शिक्षा अधिकार कानून के अमल
की तस्वीर निराश करने वाली है। इस
कानून के अमल में केवल धन की कमी ही आड़े
नहीं आ रही है, बल्कि राजनेताओं
की इच्छाशक्ति का अभाव भी समस्याएं
बढ़ा रहा है। यह समझना कठिन है
कि शिक्षा और विशेष रूप से
बुनियादी शिक्षा की हालत से परिचित
होने के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद का पांच
प्रतिशत भी खर्च करने से
क्यों बचा जा रहा है और वह भी तब जब
राज्य सरकारें पहले ही धन
की कमी का रोना रो रही हैं? यह ठीक
नहीं कि इस वर्ष भी शिक्षा के मद में
मामूली वृद्धि की गई। स्थिति कुछ बेहतर
हो सकती थी, यदि राज्य सरकारों ने इस
कानून को अमल में लाने के
प्रति थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मामले में
प्रतिबद्धता का परिचय देने वाले राज्य
इक्का-दुक्का ही हैं और यही कारण है
कि देश भर में 12 लाख से
ज्यादा शिक्षकों की कमी है। रही-
सही कसर योग्य शिक्षकों के अभाव ने
पूरी कर दी है।
स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने राज्य
सरकारों को यह निर्देश
दिया था कि स्कूलों में पीने के पानी और
शौचालयों की व्यवस्था की जाए, लेकिन
यह आदेश भी प्रभावी सिद्ध नहीं हुआ।
राज्य सरकारें शिक्षा अधिकार कानून
की किस तरह अनदेखी कर रही हैं,
इसका एक और नमूना यह है कि केवल 18
राज्यों ने अपने पाठ्यक्रम को दुरुस्त
किया है और सिर्फ 11 राज्य ऐसे हैं
जिन्होंने अभिभावकों की शिकायत सुनने के
लिए अधिकारियों की नियुक्ति की है।
वैसे तो शिक्षा अधिकार कानून के अमल में
कोई भी राज्य अपेक्षाओं पर
खरा उतरता नहीं दिख रहा है, लेकिन यह
विशेष रूप से चिंताजनक है कि उत्तर
प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल
और मध्य प्रदेश कुछ
ज्यादा ही फिसड्डी नजर आ रहे हैं। यह
कानून किस तरह असफलता की चपेट में है,
इसका पता इससे चलता है कि कुछ राज्य
इस कानून के अमल की अवधि बढ़ाए जाने
की पैरवी कर रहे हैं। ऐसा नहीं है
कि केंद्र सरकार इससे तथ्य से अनभिज्ञ
हो कि शिक्षा अधिकार कानून के अमल
की अवधि पूरी हो जाने के बावजूद राज्य
सरकारों ने अपेक्षित कदम नहीं उठाए हैं,
लेकिन उसने उन्हें यदा-कदा याद दिलाने
के अतिरिक्त और कुछ नहीं किया।
परिणाम यह है कि एक कानून जो बहुत कुछ
बदल सकता था, विफलता की कगार पर
खड़ा दिख रहा है।

Wednesday 13 March 2013

Htet 2013

फिर बदल सकती है एचटेट की तारीख
बलवान शर्मा, भिवानी : हरियाणा विद्यालय
शिक्षा बोर्ड प्रशासन द्वारा 27 व 28 अप्रैल
को आयोजित की जा रही एचटेट परीक्षा पर
खतरे के बादल मंडरा सकते हैं और इसकी तिथि में
एक बार फिर से बदलाव होने
की संभावना पैदा हो गई है।
हालांकि शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने अभी कोई
अंतिम फैसला नहीं लिया है। सूत्र बताते हैं
कि अचानक एसबीआइ की भर्ती परीक्षा आड़े आ
रही है। यह परीक्षा 28 अप्रैल को आयोजित
की जानी है। सूत्र बताते हैं कि यह
परीक्षा पंचकूला व अंबाला सहित पूरे प्रदेश में
आयोजित होनी है और एसबीआइ के
अधिकारियों ने अपनी परीक्षा तिथि में बदलाव
करने से इंकार कर दिया है। पंचकूला व अंबाला में
तो परीक्षा केंद्र भी बनाए जा चुके हैं। ऐसे में
बोर्ड अधिकारियों के सामने एक नया संकट आ
खड़ा हुआ है। नवंबर 2011 के बाद अभी तक
एचटेट का आयोजन नहीं हो पाया था।
कड़ी मशक्कत के बाद बोर्ड प्रशासन ने 27 व
28 अप्रैल को एचटेट आयोजित करने
का फैसला किया था, पर अब फिर परीक्षा आड़े
आ गई। प्रशासन ने एचटेट के लिए
तैयारियां लगभग पूरी कर ली थी।